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खाकी के दामन पर एक और दाग। पुलिस लाइन में तैनात सिपाही ने नाबालिक से की छेड़छाड़, लगातार सवालों के घेरे में जिले की कानून व्यवस्था।

रुद्रपुर। जनपद उधम सिंह नगर में कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। पुलिस लाइन पंतनगर जैसे अति-संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले परिसर में एक नाबालिग के साथ जबरन छेड़छाड़ और अशोभनीय कृत्य की घटना ने न केवल पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि जिले में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे तमाम दावों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पॉस कालोनी रुद्रपुर निवासी महिला की पुत्री शुक्रवार (16 जनवरी 2026 ) को पुलिस लाइन रुद्रपुर में अपने खेल प्रैक्टिस कार्य के लिए मनोज सरकार स्टेडियम जा रही थीं। जब वह पुलिस लाइन के परेड ग्राउंड के पास पहुँचीं, तभी एक पुलिस का सिपाही , जो कथित रूप से नशे की हालत में था, उसने नाबालिग का हाथ पकड़कर जबरन खींचा और उस के साथ अशोभनीय हरकत करते हुए जबरदस्ती छेड़छाड़ की । यह सब उस परिसर में हुआ जिसे आम तोर पर सबसे सुरक्षित माना जाता हैं।

इस घिनौनी हरकत से भयभीत पीड़िता किसी तरह आरोपी से अपना हाथ छुड़ाकर वहाँ से भागी और पास के स्टेडियम पहुँची, जहाँ से उसने अपने साथियों को मदद के लिए बुलाया। इसके बाद सभी लोग दोबारा पुलिस लाइन पहुँचे। शाम करीब पाँच बजे पीड़िता ने अपनी माँ को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पीड़िता के माता-पिता तत्काल पुलिस लाइन पहुँचे और वहाँ मौजूद अधिकारियों से आरोपी को बुलाने की माँग की।

हैरानी की बात यह रही कि घटना पुलिस लाइन परिसर में होने के बावजूद आरोपी को बुलाने में पुलिस को लगभग दो घंटे का समय लग गया। यह देरी पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। जब पुलिस अपने ही परिसर में हुई इस गंभीर घटना पर तत्काल कार्रवाई नहीं कर पाती, तो आम जनता यह उम्मीद कैसे कर सकती है कि वह सड़कों, बाजारों और सुनसान इलाकों में महिलाओं की सुरक्षा पुलिस सुनिश्चित करेगी।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब उधम सिंह नगर जिले में अपराधों पर नियंत्रण और महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस लगातार बड़े-बड़े दावे कर रही है। कभी “मिशन शक्ति” तो कभी “महिला सुरक्षा अभियान” के नाम पर पोस्टर, बैनर और प्रेस विज्ञप्तियाँ जारी होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अपराधी पुलिस की नाक के नीचे भी बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दे रहे हैं। सवाल यह भी उठता है कि यदि आरोपी सामान्य नागरिक होता तो क्या कार्रवाई इतनी ही सुस्त रहती, या फिर मामला और भी जल्दी दबाने की कोशिश की जाती।

पीड़िता की माता ने पुलिस से मांग की है कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं में तत्काल मुकदमा दर्ज कर कठोरतम कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह का अपराध करने का साहस न कर सके। साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले में पुलिस की ओर से हुई देरी और लापरवाही की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल यह मामला जिले की पुलिस व्यवस्था पर एक करारा तमाचा साबित हुआ है। पुलिस लाइन में महिला सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक कहां जाए। अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई कर अपनी साख बचा पाती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा, जैसा कि जिले में कई मामलों के साथ होता आया है।

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